Mustard Price Today:सरसों की खेती करने वाले किसानों के लिए यह समय बेहद महत्वपूर्ण बन गया है। काफी समय से सरसों के दाम सुस्त चल रहे थे, जिससे किसानों को लागत निकालना भी मुश्किल हो रहा था। लेकिन अब हालात बदलते नजर आ रहे हैं। देश की अलग-अलग मंडियों में सरसों के भाव में तेजी शुरू हो गई है, जिससे किसानों के चेहरे पर फिर से उम्मीद दिखाई देने लगी है।
सरसों के भाव बढ़ने के मुख्य कारण
सरसों की कीमतों में आई इस तेजी के पीछे कई कारण हैं। सबसे बड़ा कारण घरेलू बाजार में सरसों तेल की बढ़ती मांग है। खाद्य तेलों की खपत लगातार बढ़ रही है, जिसके चलते तेल मिलें ज्यादा मात्रा में सरसों की खरीद कर रही हैं।
इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय बाजार में खाद्य तेलों की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर भी घरेलू बाजार पर पड़ रहा है, जिससे सरसों को मजबूती मिल रही है।
कुछ प्रमुख सरसों उत्पादक राज्यों में मौसम को लेकर अनिश्चितता भी दाम बढ़ने की वजह बनी है। कहीं असमय बारिश तो कहीं ठंड और पाले की आशंका के कारण उत्पादन घटने की संभावना जताई जा रही है। जब फसल कम होने की आशंका होती है, तो बाजार में भाव अपने आप ऊपर जाने लगते हैं।
मंडियों में सरसों के ताजा भाव
वर्तमान समय में देश की कई प्रमुख कृषि मंडियों में सरसों के दाम मजबूत बने हुए हैं। सामान्य गुणवत्ता की सरसों का भाव करीब ₹6,500 से ₹7,800 प्रति क्विंटल के बीच चल रहा है। वहीं अच्छी क्वालिटी और साफ-सुथरी सरसों के दाम इससे भी ज्यादा मिल रहे हैं।
राजस्थान, मध्य प्रदेश और हरियाणा की मंडियों में तेजी का असर ज्यादा देखने को मिल रहा है। इन राज्यों में सरसों की आवक सीमित है, जबकि मांग मजबूत बनी हुई है, जिससे कीमतों को अच्छा सहारा मिल रहा है।
किसान क्यों रोक रहे हैं सरसों की बिक्री
भावों में आई तेजी के बाद किसानों की सोच में बदलाव आया है। लंबे समय तक कम कीमत झेलने के बाद अब किसान जल्दबाजी में फसल बेचने से बच रहे हैं। जिन किसानों के पास भंडारण की सुविधा है, वे बेहतर दाम मिलने की उम्मीद में सरसों को रोककर रख रहे हैं।
हालांकि कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि पूरी फसल रोककर रखना जोखिम भरा हो सकता है। इसलिए कई किसान आंशिक बिक्री कर रहे हैं, ताकि जरूरत के लिए नकदी भी मिलती रहे और आगे भाव बढ़ने का फायदा भी मिल सके।
क्या सरसों ₹10,000 प्रति क्विंटल तक जाएगी?
कृषि बाजार के जानकारों का मानना है कि मौजूदा तेजी अभी शुरुआती दौर में है। अगर आने वाले समय में सरसों की आवक कम बनी रहती है और तेल मिलों की मांग इसी तरह मजबूत रहती है, तो दाम और ऊपर जा सकते हैं।
शादी-विवाह और त्योहारों के मौसम में खाद्य तेल की खपत बढ़ जाती है, जिसका सीधा असर सरसों के भाव पर पड़ता है।
इसके अलावा अगर सरकार आयात नीति में सख्ती करती है या अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होता है, तो घरेलू सरसों की मांग और बढ़ सकती है। इन सभी कारणों को देखते हुए विशेषज्ञों का कहना है कि ₹10,000 प्रति क्विंटल का स्तर पूरी तरह नामुमकिन नहीं है।
आगे बाजार की दिशा कैसी रह सकती है
आने वाले समय में सरसों के भाव कई बातों पर निर्भर करेंगे। मौसम सबसे बड़ा फैक्टर रहेगा। अगर मौसम का असर फसल पर पड़ा और उत्पादन कम हुआ, तो कीमतों में और मजबूती आ सकती है।
साथ ही सरकारी नीतियां, स्टॉक की स्थिति और अंतरराष्ट्रीय बाजार की चाल भी भाव तय करने में अहम भूमिका निभाएगी।
किसानों के लिए सही रणनीति
मौजूदा हालात में किसानों को संतुलित रणनीति अपनानी चाहिए। जिनके पास भंडारण की सुविधा है, वे थोड़ी मात्रा रोक सकते हैं, जबकि बाकी उपज को धीरे-धीरे बेचकर जोखिम कम किया जा सकता है।
साथ ही आसपास की मंडियों के भाव पर भी नजर रखें, क्योंकि कई बार अलग-अलग मंडियों में कीमतों में अच्छा अंतर देखने को मिलता है।
सरसों के भाव में आई यह तेजी किसानों के लिए राहत और उम्मीद दोनों लेकर आई है। बाजार के संकेत फिलहाल सकारात्मक हैं और आने वाले महीनों में दाम और मजबूत हो सकते हैं। सही जानकारी, धैर्य और समझदारी से लिया गया फैसला किसानों को इस तेजी का पूरा लाभ दिला सकता है।









