सरसों के भाव में हलचल, मंडियों में उतार-चढ़ाव :Mustard Bhav Today

By Shruti Singh

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Mustard Bhav Today:देश की प्रमुख कृषि उपज मंडियों में इन दिनों सरसों के भाव को लेकर हलचल तेज हो गई है। जनवरी 2026 के तीसरे सप्ताह में कई मंडियों में सरसों के रेट में 25 से 100 रुपये प्रति क्विंटल तक की तेजी दर्ज की गई है, वहीं कुछ जगहों पर हल्की मंदी भी देखने को मिली है। खासतौर पर राजस्थान और हरियाणा की मंडियों में आवक कम रहने से भावों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है। किसानों के लिए यह समय अहम है क्योंकि सरसों की फसल लगभग तैयार है और कटाई का समय नजदीक है।

बाजार में स्थिरता और दबाव दोनों का माहौल

फिलहाल सरसों बाजार में न तो बहुत ज्यादा तेजी है और न ही बड़ी गिरावट। कमजोर मांग और व्यापारियों द्वारा सीमित खरीद के कारण भाव एक दायरे में बने हुए हैं। हालांकि सरसों के प्लांट भाव मंडियों के मुकाबले थोड़ा मजबूत नजर आ रहे हैं। इससे साफ संकेत मिलता है कि बाजार नई फसल की आवक का इंतजार कर रहा है। किसान रोजाना मंडी भाव पर नजर रखकर अपनी बिक्री की रणनीति तय कर रहे हैं।

राजस्थान मंडियों में सरसों भाव का हाल

राजस्थान की मंडियों में सरसों के भाव मिले-जुले रहे हैं।

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  • जयपुर मंडी में सरसों के भाव 7250 से 7275 रुपये प्रति क्विंटल पर बने हुए हैं।

  • भरतपुर मंडी में 20 रुपये की गिरावट के साथ भाव 6730 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज किए गए।

  • गंगापुर मंडी में भाव 6801 रुपये,

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  • अलवर मंडी में 6800 रुपये

  • और खैरथल मंडी में 6765 रुपये प्रति क्विंटल रहे।

अलग-अलग मंडियों में भावों का अंतर गुणवत्ता और आवक पर निर्भर करता है।

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हरियाणा मंडियों में सरसों के ताजा रेट

हरियाणा की मंडियों में भी सरसों के भाव स्थिर से हल्की मजबूती के साथ देखे गए।

यह क्षेत्र तेल मिलों के लिए महत्वपूर्ण है, इसलिए यहां के भाव पूरे बाजार को दिशा देने में अहम भूमिका निभाते हैं।

मध्य प्रदेश मंडियों में भाव दबाव में

मध्य प्रदेश की मंडियों में सरसों के भाव पर थोड़ा दबाव देखा गया।

कमजोर मांग और आगे नई फसल की आवक की आशंका के कारण यहां भाव दबाव में हैं।

प्लांटों में सरसों के भाव क्यों हैं मजबूत

मंडियों की तुलना में सरसों के प्लांट भाव करीब 110 रुपये प्रति क्विंटल तक ऊंचे बताए जा रहे हैं। इसका कारण यह है कि तेल मिलें जरूरत के अनुसार सीमित लेकिन अच्छी गुणवत्ता की सरसों खरीद रही हैं। हालांकि यहां भी खरीद ज्यादा नहीं की जा रही, क्योंकि मिलर्स नई फसल आने के बाद भाव गिरने के जोखिम को देखते हुए सतर्क हैं।

नई फसल और कटाई का बाजार पर असर

सरसों की फसल इस समय खेतों में तैयार खड़ी है और जनवरी के अंत से कटाई शुरू होने की संभावना है। फरवरी के मध्य तक ज्यादातर क्षेत्रों में कटाई पूरी हो जाती है। जैसे ही मंडियों में नई फसल की आवक बढ़ेगी, सरसों के भाव पर दबाव बन सकता है। इस साल बुवाई अधिक होने से उत्पादन अच्छा रहने का अनुमान है, जिससे सप्लाई बढ़ने की संभावना है।

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शादी सीजन से बढ़ सकती है सरसों तेल की मांग

आने वाले दिनों में शादी-विवाह का सीजन शुरू होने वाला है, जिससे सरसों तेल की मांग में बढ़ोतरी हो सकती है। होटल, कैटरिंग और घरेलू खपत बढ़ने से तेल मिलों की खरीद बढ़ सकती है। हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि यह मांग सीमित समय के लिए होगी और नई फसल की भारी आवक के सामने बहुत बड़ी तेजी नहीं आएगी।

कुल मिलाकर, सरसों बाजार में इस समय सतर्कता का माहौल है। भाव न ज्यादा तेज हैं और न ही बहुत कमजोर। किसानों को सलाह दी जा रही है कि वे एक साथ पूरी फसल बेचने के बजाय भाव देखकर चरणबद्ध बिक्री करें। आने वाले हफ्तों में सरसों के भाव कटाई और आवक की रफ्तार पर निर्भर करेंगे।

डिस्क्लेमर

यह लेख विभिन्न मंडियों और बाजार सूत्रों से प्राप्त जानकारी पर आधारित है। सरसों के भाव स्थान, गुणवत्ता और समय के अनुसार बदल सकते हैं। किसी भी व्यापारिक निर्णय से पहले अपनी नजदीकी मंडी या विशेषज्ञ से पुष्टि अवश्य करें।

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